माननीय केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री जी ने एनडीडीबी, आणंद में डेयरी सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए नई किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया

माननीय केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री जी ने एनडीडीबी, आणंद में डेयरी सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए नई किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया
आणंद, 18 सितंबर 2026: भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री, माननीय श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 18 सितंबर 2026 को एनडीडीबी, आणंद में मुख्य अतिथि के रूप में डेयरी सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए चार नई किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री, माननीय प्रो. एस. पी. सिंह बघेल जी उपस्थित रहे। भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार; डीएएचडी की अपर सचिव सुश्री वर्षा जोशी; एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह; एनडीडीबी की सहायक कंपनियों के प्रबंध निदेशक; डीएएचडी, एनडीडीबी के अधिकारी तथा डेयरी किसान भी उपस्थित रहे।
इन पहलों में मदर डेयरी (एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) के 10 ग्राम बटर चिपलेट्स शामिल हैं, जो बटर श्रेणी में उसकी उपस्थिति को बढ़ाएंगे; एनडीडीबी द्वारा विकसित मिल्क एडल्टरेशन डिटेक्शन किट्स (एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनडीडीबी काफ लिमिटेड द्वारा निर्मित), जो मिलावट की सुविधाजनक और किफायती जांच में सक्षम बनाएंगे; एनडीडीबी द्वारा डिजाइन किया गया लिथियम-आयन बैटरी से संचालित 300 लीटर क्षमता वाला मोबाइल मिल्क कलेक्शन एंड कूलिंग सिस्टम, जिसमें आईओटी मॉनिटरिंग सुविधा है और जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे दूध संकलन के लिए तैयार किया गया है। इसमें दूध का वजन, गुणवत्ता परीक्षण और रसीद तैयार करने की सुविधा भी है। इसका निर्माण एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आईडीएमसी लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसके अतिरिक्त, ‘दर्पण’ भी इन पहलों में शामिल है, जो एनडीडीबी में कार्यान्वित किया जा रहा एक एकीकृत डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम है।
एनडीडीबी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह जी ने कहा कि भारत अब विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन संगठित बाजार की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा दूध और दूध उत्पादों की मात्रा सुनिश्चित करने के क्षेत्र में अभी भी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण दूध जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। माननीय केंद्रीय मंत्री जी ने एनडीडीबी की चार नई पहलों की सराहना करते हुए इनके व्यापक स्तर पर कार्यान्वयन और व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से मदर डेयरी के 10 ग्राम बटर चिपलेट्स, मिल्क एडल्टरेशन डिटेक्शन किट्स तथा मोबाइल मिल्क कलेक्शन एंड कूलिंग सिस्टम के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन और व्यावसायीकरण पर बल दिया। उन्होंने एनडीडीबी की डिजिटलीकरण पहल ‘दर्पण’-एकीकृत डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम-की भी सराहना की।
इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. एस. पी. सिंह बघेल जी ने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग को कृषि मंत्रालय से अलग कर एक स्वतंत्र इकाई बनाया गया, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत विश्व स्तर पर प्रथम स्थान पर है। प्रो. बघेल जी ने कहा कि श्वेत क्रांति की शुरुआत इसी स्थान, आणंद से हुई थी और आज भारत में प्रति व्यक्ति दूध की खपत वैश्विक औसत से अधिक है। उन्होंने विशेष रूप से एनडीडीबी की ईटी, आईवीएफ और सेक्स-सॉर्टेड सीमन प्रौद्योगिकियों की सराहना की और इन्हें अपने हृदय के करीब की पहल बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि लक्ष्य डेयरी सहकारी समितियों को सुदृढ़ करना और नई सहकारी समितियों की स्थापना करना है, ताकि असंगठित क्षेत्र को संगठित क्षेत्र में परिवर्तित किया जा सके तथा इस क्षेत्र से जुड़ी कमियों और चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि आज का कार्यक्रम डेयरी क्षेत्र के प्रति एनडीडीबी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें किसानों और सहकारिता आंदोलन को सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी, आणंद में माननीय केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है, जो पशुपालन एवं डेयरी सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आणंद की विरासत भारत के डेयरी सहकारी आंदोलन से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। एनडीडीबी आधुनिक प्रौद्योगिकी और प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से प्रोड्यूसर-ओन्ड एंटिटीज़ को सशक्त बना रही है। एनडीडीबी राज्यों और दूध संघों के साथ साझेदारी में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के माध्यम से नई डेयरी सहकारिताओं की स्थापना तथा मौजूदा समितियों को सुदृढ़ करने को प्राथमिकता दे रही है। एनडीडीबी, डीएएचडी के साथ मिलकर पशुओं के लिए कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमन, एम्ब्रियो ट्रांसफर एवं आईवीएफ तथा जीनोमिक चयन सहित उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का भविष्य सस्टेनेबल उत्पादन पर निर्भर है। इस दिशा में घरेलू बायोगैस, केंद्रीकृत एनर्जी सॉल्यूशंस और बायो-सीएनजी जैसी पहलों के माध्यम से एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तथा किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
किसान-केंद्रित और नवाचार-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, एनडीडीबी ने चार महत्वपूर्ण नवाचार प्रस्तुत किए। यद्यपि ये नवाचार विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं, लेकिन इन सभी का साझा उद्देश्य डेयरी क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, दक्ष, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।

