एनडीडीबी, आणंद में भेड़, बकरी, ऊंट और अन्य नॉन- बोवाइन दूध पर आईडीएफ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

एनडीडीबी, आणंद में भेड़, बकरी, ऊंट और अन्य  नॉन- बोवाइन दूध पर आईडीएफ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

10 फरवरी 2026, आणंद: अंतरराष्ट्रीय डेयरी फेडरेशन की भारतीय राष्ट्रीय समिति (INC-IDF) द्वारा आयोजित भेड़, बकरी, ऊंट एवं अन्य नॉन-बोवाइन दूध पर 9वीं आईडीएफ संगोष्ठी 9 फरवरी 2026 को एनडीडीबी, आणंद में आरंभ हुई, जो 11 फरवरी 2026 तक चलेगी। उद्घाटन सत्र में श्री गिल्स फ्रोमेंट, अध्यक्ष, आईडीएफ; डॉ. मीनेश शाह, अध्यक्ष, एनडीडीबी, बोर्ड सदस्य, आईडीएफ एवं सचिव, आईएनसी-आईडीएफ; डॉ. नवीना बी महेश्वरप्पा, पशुपालन आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार; श्री ताकायुकी हागिवारा, भारत में एफएओ प्रतिनिधि; सुश्री लॉरेंस राइकेन, महानिदेशक, आईडीएफ सहित आईडीएफ बोर्ड के सदस्य, शिक्षाविद्, उद्योग जगत के लीडर, दुग्ध उत्पादक, प्रसंस्करणकर्ता, नीति-निर्माता तथा डेयरी क्षेत्र के विभिन्न पेशेवर उपस्थित रहे।

इस संगोष्ठी में 90 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें सात तकनीकी सत्रों में उभरते बाजार एवं उपभोक्ता रुझान; आजीविका एवं छोटे किसानों का सशक्तिकरण; नॉन-बोवाइन दूध का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव; फार्म प्रबंधन की रणनीतियां; संसाधन अनुकूलता एवं सस्टेनेबिलिटी; नॉन-बोवाइन दूध में प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता एवं नवाचार; नॉन-बोवाइन डेयरी उत्पाद का विकास; पोषण संबंधी मानदंड एवं जैव-कार्यप्रणालियां;  नॉन-बोवाइन में जैव-सुरक्षा एवं रोग प्रबंधन; तथा नॉन-बोवाइन दूध के लिए वैश्विक मानक एवं नीतियां जैसे विषय शामिल हैं।  नॉन-बोवाइन दूध से संबंधित पोस्टर प्रदर्शित किए जा रहे हैं और प्रदर्शकों ने अपने नवाचार, तकनीकी एवं सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान कीं।

श्री गिल्स फ्रोमेंट ने कठोर जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए बकरी, भेड़ और ऊंट के दूध को सस्टेनेबल विकल्प के रूप में रेखांकित किया उन्होंने छह प्राथमिकताओं - पर्यावरण, पशु कल्याण, पोषण, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और समावेशिता का उल्लेख किया तथा यह बताया कि वैश्विक दुग्ध उत्पादन एक अरब टन से अधिक होने के बावजूद इसकी वृद्धि असमान रही है। भारत की 25% उत्पादन हिस्सेदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने खाद्य सुरक्षा, नवाचार और सुदृढ़ पोषण-आधारित आँकड़ों के माध्यम से नॉन-बोवाइन दूध क्षेत्र के विस्तार का आह्वान किया। आईडीएफ की वैश्विक मानकों में भूमिका पर बल देते हुए, उन्होंने विशेषकर एफएओ द्वारा घोषित 2026 के चरागाहों एवं चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष (International Year of Rangelands & Pastoralists) के संदर्भ में, मज़बूत सहयोग और जलवायु-अनुकूल पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया ।

डॉ. मीनेश शाह ने अपने संबोधन में नॉन-बोवाइन दूध के बढ़ते महत्व पर बल दिया, जो जलवायु-अनुकूल, पोषण-सहायक है और जिसका प्रबंधन प्रायः महिलाओं द्वारा किया जाता है। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से भारत की दूध क्षेत्र की कमी से आत्मनिर्भरता तक की विकास यात्रा का स्मरण किया। सहकारिता और राष्ट्रीय डेयरी योजना जैसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर विकास पर जोर देते हुए, उन्होंने एफएमडी और ब्रुसेलोसिस के नि:शुल्क टीकाकरण के साथ पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम सहित एनडीडीबी की पहलों को रेखांकित किया, जिसमें पशु रोग नियंत्रण, उत्पादकता लाभ के लिए सेक्स -सॉर्टेड सीमन और जीनोमिक उपकरणों जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने अमूल की सरहद डेयरी के माध्यम से बकरी के कृत्रिम गर्भाधान और ऊंट के दूध के विपणन में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी और किसानों को उपभोक्ता मूल्य सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मॉडलों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने नॉन-बोवाइन दूध की क्षमता का पता लगाने के लिए सस्टेनेबिलिटी, प्रसंस्करण, रोग प्रबंधन और पोषण पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुसंधान से आगे बढ़कर सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया।

डॉ. नवीना बी महेश्वरप्पा ने भारत की सस्टेनेबल आहार पद्धति और विविध एनिमल प्रोटीन की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 2026 के चरागाहों एवं चरवाहा समुदायों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष (International Year of Grazing Lands & Pastoralists) के संदर्भ में इस संगोष्ठी की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने  नॉन-बोवाइन दूध को पोषक तत्वों से समृद्ध, जलवायु-अनुकूल तथा जैविक एवं फ्री-रेंज प्रणालियों के माध्यम से उत्पादित उत्पाद के रूप में बढ़ावा देने का आह्वान किया और भेड़, बकरी एवं ऊंट आधारित मूल्य शृंखलाओं को निम्न-कार्बन प्रणालियां बताया। उन्नत प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों तथा सुदृढ़ प्रमाणीकरण पर बल देते हुए उन्होंने विज्ञान-आधारित, क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण, ट्रेसेबिलिटी और विशेषज्ञ सहयोग के माध्यम से जलवायु अनुकूल, उच्च-मूल्य उत्पादों तथा सुदृढ़ मूल्य शृंखलाओं के निर्माण का आह्वान किया।

श्री ताकायुकी हागिवारा ने भारत के डेयरी भविष्य के संबंध में ऊंट, बकरी और भेड़ के दूध के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने गोट चीज़ जैसे उत्पादों के मजबूत मूल्य शृंखला, मार्केटिंग और प्रचार की आवश्यकता का उल्लेख किया। राजस्थान और कच्छ, विशेषकर सरहद डेयरी, में प्राप्त अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऊंट के दूध के पोषण मूल्य की बढ़ती मान्यता को रेखांकित किया और आईसीएमआर के सहयोग से अधिक से अधिक  वैज्ञानिक अनुसंधान किए जाने का आह्वान किया। एनडीडीबी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में बकरी और ऊंट के दूध के विकास में उल्लेखनीय वृद्धि की व्यापक संभावनाएं है। उन्होंने पशुपालक समुदायों की आजीविका में सुधार लाने और  नॉन- बोवाइन दूध की क्षमता का पता लगाने के लिए एनडीडीबी और भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने की एफएओ की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सुश्री लॉरेंस राइकेन ने भारतीय राष्ट्रीय समिति और एनडीडीबी का आभार व्यक्त करते हुए और विज्ञान-सम्मत समावेशी डेयरी विकास में भारत के नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना करते हुए इस संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और उपभोक्ताओं की बढ़ती अपेक्षाएं, इस क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों का उल्लेख किया और भारत, मध्य-पूर्व तथा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों के लिए  नॉन-बोवाइन दूध को आजीविका का महत्वपूर्ण विकल्प बताया। भारत की डेयरी विविधता और महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने मूल्य शृंखला की बाधाओं को दूर करने, क्षेत्रों और विशेषज्ञों को जोड़ने तथा सस्टेनेबिलिटी को सुदृढ़ करने हेतु डेटा-आधारित व्यावहारिक रणनीतियों को अपनाने  का आह्वान किया। उन्होंने लोगों को पोषण प्रदान करने और आजीविका का समर्थन करने के प्रति साझा वैश्विक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।