ग्रामीण भारत में डेरी महत्‍वपूर्ण विकास की गतिविधि है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

एनडीडीबी द्वारा किसान कल्‍याण दिवस समारोह का आयोजन

ग्रामीण भारत में डेरी महत्‍वपूर्ण विकासकी गतिविधि है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

आणंद, 2 मई 2018: आज राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने एनडीडीबी के डॉ. कुरियन सभागार में किसान कल्‍याण दिवस समारोह का आयोजन किया । यह कार्यक्रम ग्राम स्‍वराज अभियान का एक हिस्‍सा है जिसकी घोषणा अंबेडकर जयंती के अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की गई थी ।

आणंद के डेरी किसानों को संबोधित करते हुए, श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा डेरी किसानों की आय को दोगुना करने संबंधी हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा निर्धारित लक्ष्‍य को हासिल करने में निश्चित ही अहम भूमिका निभाएगी । श्री रथ ने कहा, ’’लाखों भूमिहीन, छोटे एवं सीमांत डेरी किसानों और उनका प्रतिनिधित्‍व करने वाली उत्‍पादक संस्‍थाओं के सामूहिक प्रयासों के लिए उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूँ जिसकी वजह से हम दूध उत्‍पादन में न केवल आत्‍मनिर्भर बन पाए हैं बल्कि विश्‍व के अग्रणी दूध उत्‍पादक भी हो सके हैं । आज, भारत विश्‍व दूध उत्‍पादन में लगभग 20.2%  का योगदान दे रहा है और हम पिछले 5 वर्षों से लगातार लगभग 5.7% के वार्षिक दर से वृद्धि कर रहे हैं ।‘’

अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने बताया कि डेरी एक महत्‍वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है जो पशुधन क्षेत्र के उत्‍पादन मूल्‍य में लगभग 67%  का योगदान देती है । डेरी से प्राप्‍त आय छोटे और सीमांत किसानों के लिए लगभग 25%  का योगदान देता है । अत: शेयर (इक्विटी) के साथ कृषि में वृद्धि हासिल करने के लिए डेरी विकास ग्रामीण भारत की एक अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विकास गतिविधि है। सीमित संसाधनों, पर्यावरणीय समस्‍याओं और कम उत्‍पादकता वाले पशुओं की विशाल पशु आबादी के साथ डेरी मूल्‍य श्रृंखला में सभी स्‍तरों पर कार्यकुशलता सुनिश्चित करके ही हम दूध में अपनी आत्‍मनिर्भरता को निरंतर बरकरार रख सकते हैं और किसानों की आय को दोगुना कर सकते हैं।

यह कार्यक्रम मुख्‍यत: डेरी की वैज्ञानिक पद्धतियों पर केंद्रित था जिसके चार प्रमुख विषय इस प्रकार थे – फ्लेक्‍सी बायोगैस संयंत्र अपनाकर खाद का प्रबंधन करना, विभिन्‍न प्रकार की नस्‍लों एवं प्रजनक प्रक्रियाओं के जरिए दूध उत्‍पादन में वृद्धि करना, इष्‍टतम लागत पर उपयुक्‍त पशु पोषण प्रक्रियाओं के जरिए किसानों की आय में वृद्धि करना और रोकथाम संबंधी एवं उपचारात्‍मक स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा प्रबंधन अपनाकर पशु स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा की लागत में कमी लाना ।